Sunday, July 5, 2020

वृत्तांत 4 - दर्शन

साथियों नमस्कार |आज मैं आपके सामने प्रस्तुत हूँ एक बिल्कुल अद्भुत वृत्तांत लेकर जिसे सुनकर मैं बिल्कुल अचंभित रह गया था |यह वृत्तांत मेरे एक मित्र ने आज सुबह दुकान पर बुला कर सुनाया जो कि अक्षरक्षः निम्नलिखित है -

मैं वही एक साधारण सा प्लम्बिंग एवं सैनेट्री की एक छोटी सी दुकान पर बैठा छोटा सा व्यापारी जो कि हर दिन एक नयी आशा के साथ अपने घर से दुकान निकलता है और यह उम्मीद रखता है कि दिन भर में इतना तो कमा ही लेगा के घर की ज़रूरत पूरी कर लेगा और मार्केट के पेमेंट चुकता कर देगा | कल का दिन सुबह से ही खराब था क्यूंकि दुकान खोलते ही एक ग्राहक बचा हुआ माल वापस ले आया और मैंने उसके पैसे वापस दिए |दिन भर ग्राहकों का ग्रहण लगा रहा |सांझ ढल रही थी और बोहनी-बट्टे का नामोनिशान नहीं था | तभी गोधूलि बेला के समय एक बूढ़ा आदमी दुकान में आया और बोला "भगवान् की टाइल है क्या?" मैंने कहा "कौनसे भगवान् की टाइल चाहिए?" बूढ़ा बोला "हनुमान जी की, राम दरबार की और शिव जी की |" मैंने टाइलें निकाल कर वृद्ध को दिखा दी और 50 रुपये प्रति नग के हिसाब से 150/- ले लिए | वृद्ध जब जाने लगे तो मैंने उनसे यूं ही पूछा "आप शैव हैं या वैष्णव?" वृद्ध ने मेरी तरफ देखा और कहा" सड़क की तरफ देख कर बताओ कि तुम्हें क्या दिख रहा है |" मैंने सड़क की ओर देखा और कहा "मुझे तो सड़क पर वाहन और कुछ लोग आते जाते दिखाई दे रहे हैं |" वृद्ध ने कहा "आज सांझ को दुकान थोड़ा देर से बढ़ाना और ज़रा गौर से सड़क को देखना | जब कभी अपना मिलना हो तो बताना कि क्या देखा |" मैंने सोचा कि डोकरा बावला है तो मैंने आगे बात नहीं की और उन्हें जाने दिया | 

वृद्ध के जाने के बाद एक ग्राहक और आया और 10,000/- का सामान लिखवा गया जिसका भुगतान सामान पहुंचने पर टेम्पो वाले को होना था | मैंने टेम्पो से सामान भिजवा दिया और पेमेंट का इंतज़ार करने लगा | अंधेरा हो गया था तो मैं दुकान बढ़ा कर सीढ़ियों पर ही बैठ गया और टेम्पो वाले का इंतज़ार करने लगा जो कि पेमेंट लाने वाला था | सड़क सुनसान थी और सरकारी लैम्प उजाला करने की कोशिश में व्यस्त था | मैं अपने खयालों में मगन था तभी एक सफेद आकृति सड़क पर बैठी हुई दिखी | गौर से देखने पर मालूम हुआ कि ये तो और कोई नहीं स्वयं हनुमानजी हैं | मुझे विश्वास नहीं हुआ तो जब मैंने पलक झपकी तो वह आकृति गायब हो गयी थी | अब मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे और मुझे चक्कर से आने लगे थे | मेरे आगे अंधेरा हो गया था और कुछ नहीं दिख रहा था | तभी आसपास कुछ हलचल ने मेरा ध्यान आकर्षित किया | जब मैंने अपना होश संभाला तो मैं पागल सा हो गया जब मैंने देखा कि हनुमानजी मेरे पास खड़े हैं और मुझे पूछ रहे हैं "वत्स, मैं शैव हूँ या वैष्णव?" मैं मूर्छित हो कर गिर पड़ा |

जब मुझे होश आया तो मैं अपने घर पर था और आसपास मेरी पत्नी और 6 साल के बच्चे अयन के साथ-साथ 2 पड़ोसी दुकानदार भी थे | उन्होंने बताया कि टेम्पो चालक जब पेमेंट देने आया था तो उसने मुझे मूर्छित पाया और पास की दुकानों पर लिखे नंबरों पर फोन करके उन्हें बुलाया और घर लेकर आए | मैं कुछ बोल पाता इससे पहले ही मेरे साथी दुकानदार बोले "भाईसाहब, धंधे की इतनी फ़िक्र ना किया करो, अभी तो सबकी हालत पतली हो रखी है |ये तो अच्छा हुआ कि टेम्पो वाला वहां आ गया था समय पर वर्ना तो कोई भी आपका सामान और पैसा लेकर भाग जाता |" मेरी धर्मपत्नी भी बोलने लगी कि मैं सारा दिन तो धंधे का सोचता ही हूँ साथ में घर आने के बाद भी धंधे की ही बात करता रहता हूँ | मैं सब एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल रहा था क्यूंकि आज जो मैंने अनुभव किया था वो किसी को भी नहीं बता सकता था |

आह! वह असाधारण अद्वितीय अनुभूति जो इहलोक में शायद ही बिरले लोगों को होती होगी | क्या बताऊँ आपको | वह चंद्रमा सा शरीर जिस पर मोतियों और सीपीयों का हार सुसज्जित था|एक कंधे पर नाग विराजमान तो दूसरे पर कमल के फूल की माला |एक हाथ में कमण्डल तो दूसरे हाथ में शंख | एक पैर में लकड़ी की सुंदर कढा़ऊ तो दूसरे पैर में पत्तों का पदत्राण| शरीर के एक ओर राख लगी हुई तो दूसरी तरफ सिंदूर | वस्त्र भी ऐसे की किसी मशीन से ना सिले जा सकें, पूरी तरह से शीशम की छाल ओर पटसन से बना कपड़ा जो कि कोई उम्दा कारीगर ही बना सकता है | क्या था ये सब? क्या था उनके प्रश्न का मतलब? और कौन था वह वृद्ध? अब कैसा रहेगा मेरा आगे का जीवन? यह सब सोचते सोचते मैं कब सो गया मालूम ही नहीं चला |

तो साथियों, ये था वो वृत्तांत जो मेरे मित्र ने आज 
सुबह मुझे सुनाया और मैंने अपको |मैं नहीं जानता कि ये सब क्या था और क्यूं लेकिन मैं इतना जानता हूँ कि कितना कुछ हम दैनिक जीवन में अनुभव करते हैं जो कि हम किसी से साझा नहीं कर पाते हैं क्योंकि हमें मालूम है कि लोग विश्वास नहीं करेंगे| ख़ैर साथियों,अभी आपसे विदा लेता हूँ  इस वचन के साथ कि जल्द ही आपके सामने एक और नये वृत्तांत के साथ प्रस्तुत होऊंगा | मेरा प्रणाम स्वीकार करें |