Monday, November 15, 2021

वृत्तांत-८ भाग-३

पिछले भाग से आगे जारी. .....

मैं तेजी से स्कूटर दौड़ाता हुआ जा रहा था कि दो चौराहा आगे मुझे पंडो का एक समूह रेलवे स्टेशन की तरफ़ जाता हुआ दिखा| मैंने अपना स्कूटर धीरे किया और उनकी तरफ़ घुमा दिया| नुक्कड़ पर पान वाले के पास स्कूटर खड़ा करके मैं उनके पीछे हो लिया| मैंने उनसे कोई बात शुरू नही की लेकिन उनकी बातें सुनने लगा| उनमें से एक व्यक्ति बहुत ही उम्रदराज थे और अँग्रेजी-हिंदी मिश्रित बोल रहे थे वहीं दूसरी ओर एक युवक उनसे कुछ पूछ रहे थे जिसका उत्तर वे वृद्ध व्यक्ति दे रहे थे| मेरे हिसाब से वो युवक शायद कोई पत्रकार थे और वो वृद्ध व्यक्ति कोई संत| वृद्ध व्यक्ति कह रहे थे " हिंदू एक भौगोलिक स्थिति को भी दर्शाता है, पंथ-संस्कार को भी दर्शाता है और रक्त सम्मिश्रण को भी| जब इन तीनों अभिलक्षण को मिला दिया जाता है तो हिंदुत्व की उत्पति होती है| जो पंथ-संस्कार को ही मानते हैं वो हिंदू-धर्म को ही मान रहे हैं लेकिन भौगोलिक स्थित एवं रक्त सम्मिश्रण के प्रति उनके विचार अलग हैं इसलिए वो हिंदुत्व का समर्थन नहीं करते हैं और 'हंटर हिंदुइसम्' (Hunter Hinduism) के नाम से संबोधित किया करते हैं|" युवक ने पूछा " क्या हिंदुत्व को 'हंटर हिंदुइसम्' कहा जा रहा है?" वृद्ध व्यक्ति ने कहा " नहीं| हिंदुत्व एक तार्किक मान्यता है जबकि इस मान्यता को चाबुक अथवा कुतर्कि हिंसा के ज़ोर पर मनवाने वाले गैंगवादी लोगों के कुकृत्यों से यह हंटर हिंदुइसम् का रूप धारण कर लेता है|" युवक ने फ़िर पूछा " मुझे क्या मानना चाहिए: हिंदू-धर्म या हिंदुत्व या हंटर हिंदुइसम्? " वृद्ध ने कहा " मान्यता किसी के कहने से मानो तो फ़िर हिंदू होने का लाभ ही क्या हुआ? किसी को ना मानना भी हिंदू-धर्म की सुंदरता को दर्शाता है| वहीं अगर पित्रभूमि और पुण्यभूमि के प्रति भी आसक्ति है तो हिंदुत्व उपलब्ध है लेकिन ध्यान रहे की हिंदुत्व की डगर बहुत संकरी है जिसके एक तरफ़ आत्मबोध है तो दूसरी तरफ़ हंटर-हिंदुइसम्|"

मैं अब पागल होने वाला था|अपना सिर पकड़ कर मैं खिलौनों की दुकान के बाहर बनी सीढ़ी पर बैठ गया| थोड़ा सोच कर उठा और दुकान के अंदर चला गया| इधर उधर खिलौनों पर नज़र दौड़ाई ताकि समय काट सकूँ| ग्राहक देख कर मालिक ने पूछा " बच्चा कितने साल का है? " मैंने अनमने कहा " सात साल का |" दुकान्दार ने फ़िर पूछा " कितने बजट का दिखाऊँ?" मैंने कहा "बजट की तो समस्या नहीं है लेकिन ये सब तो चीनी लग रहे हैं| मेड इन इंडिया दिखाइये|" दुकान्दार ने घूर कर देखा और कहा "भाईसाहब| ये सारा माल चीन से ही आता है और आपको हर जगह ये ही मिलेगा|" मुझे कुछ खरीदना तो था नहीं तो मैंने कहा "मैं एक देशप्रेमी हूँ, चीन का माल नहीं खरीदूँगा|" दुकान्दार खिसियता हुआ अपने गल्ले के पास चला गया और बड़बड़ाने लगा| मैं भी वापस जाने लगा तो एक पोस्टर पर नज़र गयी जिसमें गौ सेवा संस्थान ने दान पुण्य के लिए रेट लिस्ट लगा रखी थी जिसके तहत गुड़ सेवा के 1100/- रुपये, बाजरा सेवा के 2100/- रुपये और तिल्ली तेल के 3100/- रुपये के सहयोग के लिए संकल्प मांगा गया था| मैंने 2100/- का पेटीएम डाल दिया और जाने लगा| दुकान्दार ने रोका और पूछा " भाईसाहब, एक बात पूछनी थी| आपने इस मंदी में भी 2100/- का पेटीएम डाल दिया बिना ये पूछे की ये पैसा वाकई में गौ सेवा में ही लगेगा या नहीं!? " मैंने कहा " आज मेरा मूड खराब था, समय काटने आपकी दुकान में घुस गया और बिना सोचे जाने ही दान भी कर दिया| मनुष्य चरित्र बड़ा विचित्र है| एक तरफ़ तो मैंने देशप्रेम की भावना दिखा कर आपके माल को दरकिनार कर दिया और वहीं दूसरी तरफ़ बिना जाने दान कर डाला|गाय एक बहुत उपयोगी पशु है और हमारे समाज में पूजनीय भी तो मैंने जेब ढीली कर दी| गाय हमारे लिए इतनी पूजनीय है कि उसके मांस और चमड़े के निर्यात के व्यापार पर कब्ज़े के लिए 'हंटर' पागल हो उठे|" दुकान्दार के कुछ समझ नहीं आ रहा था पर वो यह समझ गया था की बहस नहीं करनी है वरना चिल्लम-चिल्ली हो जाएगी| उसने एक चमकने वाला लट्टु और रस्सी दिया मेरे बच्चे के लिये और कहा " गौ माता आपके परिवार को हमेशा प्रसन्न रखे|" मैं धन्यवाद कर दुकान के बाहर आ गया और धीमी गति से पान वाले की तरफ़ बढ़ गया जहाँ मेरा स्कूटर खड़ा था|

आगे जारी है ........