साथियों, आज मैं आपके सम्मुख मेरे एक मित्र का वृतांत पेश कर रहा हूं जो कि उसने मुझे आज दोपहर में ही सुनाया था और मैं स्वयं को रोक नहीं पाया आपके सामने प्रस्तुत करने से |अक्षरक्षः वृतांत निम्नलिखित है -
मैं प्लम्बिंग एवं सैनेट्री का एक छोटा सा व्यापारी हूँ जो कि 15x25 की दुकान में अपना सामान रखता है और राजी खुशी बेचता है | लॉकडाउन के बाद एक चीज़ जो मार्केट में देखने को मिली के पैसा सब कुछ नहीं है बल्कि व्यवहार ज़्यादा महत्वपूर्ण है| मेरे साथ घटी एक घटना आपको सुनाना चाहूँगा | लॉकडाउन के समय मुझे 3 लोगों को पेमेंट चुकाना था जो कि नहीं चुके क्यूंकि सब कुछ बंद कर दिया गया था |दो मेरे घनिष्ठ से थे और एक से साधारण व्यवहार था |उनमें से साधारण व्यवहार वाले सप्लायर ने 12 अप्रैल को मुझसे संपर्क किया और कहा कि पैसों की सख्त जरूरत है इसलिए पेमेंट करवा दीजिए सो मैंने उनको सुबह जल्दी ही 5 बजे बुलाया और चुकावणा करके रवाना किया |
जब 14 मई को प्लम्बिंग की दुकान खोल लेने का आदेश आया तो मैंने अपनी भी दुकान खोल ली और सीमित समय के लिए खोलने लगा | अगले दिन सुबह मेरे 6 साल के बच्चे अयन के बुखार आया तो घर में हड़कंप मच गया | हमें कुछ समझ नहीं आ रहा था | मैंने अपने पड़ोसी को बुलाया तो वह आने से मना कर दिए |मेरे परिजन ख़ास दोस्त भी दूर रहने के कारण नहीं आ सकते थे | मुझे कुछ भी नहीं सूझ रहा था तो मैंने अपने 2 सप्लायर्स को फ़ोन लगा दिया जिनको पेमेंट भी करना था | उनमें से एक तुरंत घर के बाहर आ गए और मुझे बाहर बुलाया| मैं गया तो उन्होंने कहा कि पेमेंट चाहिए |मैं हक्का बक्का रह गया | वो मेरा चेहरा पढ़ कर बोले कि सेठ जी जीवन का कोई भरोसा नहीं है और बुरा मत मानना ऊपरवाला ना करे के आपके यहां किसी को भी कोरोना की बीमारी लगे लेकिन अगर हो गयी तो मेरा पेमेंट तो गया, इसलिए आप मेरा चुकावणा करके मुझे मुक्त किजिए | मैं चुपचाप अंदर गया और अलमारी की ओर बढ़ा |मैं जानता था कि मेरे पास इतना ही है कि मैं उसका पेमेंट कर सकूं | मैंने पैसे लिए और उस सप्लायर को सौंप दिए | गिनने के बाद मेरी पर्चियां मुझे सौंप कर स्कूटर चालू करके वो बोला कि सेठ जी अब माल कैश में मिलेगा और वो चल दिया |
मैं कुछ समझ पाता इतने में मुझे मेरे दूसरे सप्लायर आते दिखे तो मैं सोचने लगा कि इनके लिए तो पेमेंट है ही नहीं और कहीं से व्यवस्था भी नहीं हो सकती है अभी तो | इतना सोचते सोचते वो मेरे नज़दीक आ गये और अपना स्कूटर रोक कर सीधे मुझे अंदर चलने को बोले | मैं उन्हें अंदर ले गया और जब मैं उनसे कहने ही वाला था कि आज पेमेंट नहीं हो पाएगा तो उन्होनें कहा कि अयन कहाँ है? मैं उन्हें अयन के पास ले गया तो उन्होंने व्हाट्सएप पर विडियो कॉल के ज़रिए अपने मित्र डॉक्टर को संपर्क करके यथास्थिति बताई | डॉक्टर ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, लक्षण साधारण वायरल फीवर के लग रहे हैं इसलिए आप पास की किसी भी मेडिकल की दुकान पर जाकर मेरी बात करवा दीजिए | हम भागे भागे मुख्य सड़क पर स्थित मेडिकल दुकान पर पहुचे और डॉक्टर से बात करवायी | तब तक डॉक्टर ने दवाइयाँ अपनी अस्पताल की पर्ची पर लिख कर व्हाट्सएप पर भेज दी थी | पर्ची देख कर और डॉक्टर से बात करके केमिस्ट ने दवा दे दी और हम तुरंत घर पहुंच के सीधे अयन के पास गए और उसे दवा दी |
मेरे सप्लायर बाहर ही थे और मेरा इंतज़ार कर रहे थे | दवा देकर मैं बाहर आया तो मेरे कहने से पहले ही उन्होने कहा कि अगर कोई इमर्जेंसी पड़े तो तुरंत याद करना और ये कहकर उन्होने 50,000/- रुपये निकाल कर मेरे शर्ट की ऊपर की जेब में रख दिये | मैंने कहा कि इसकी ज़रूरत नहीं है, मेरे पास हैं पैसे | उन्होंने कहा कि जब मैं आपके यहां आ रहा था तब वो दूसरा सप्लायर जाते हुए मुझे स्कूटर से ही बोल रहा था कि निकाल लो अपना पैसा, ये तो भागेगा | इतना सुन कर मैं अवाक् रह गया | मेरे सप्लायर बोले "वो आदमी तो मार्केट में आपके बारे ये ही बोलता रहा था हमेशा लेकिन मैंने कभी उसकी बात से स्वयं को प्रभावित नहीं होने दिया | ऐसे लोगों से आप भी मित्रता ना रखें क्यूंकि ये आप की दुकान से जलते हैं और सोचते हैं कि ये माल तो हम से उठाता है और दुनिया के सामने सेठ बन जाता है | ऐसे व्यक्ति का पगफेरा दुकान और घर दोनों के लिए घातक हो सकता है क्यूंकि ये लोग मौका लगने पर आपके घर की भी बुराई करने से नहीं चूकते |अगर मेरी बातें आप को अजीब लग रहीं हैं तो 20 साल रुक जाइये, जब आपका लड़का शादी के लायक हो जाएगा तब ये ही आदमी आपके बच्चे के लिए मार्केट में चुपके से अफ़वाहें फैलाने लगेगा कि लड़का तो ऐबी है, जुआरी है, लड़कीबाज है, शादी करते ही दुकान छोड़ कर भागेगा, 1 करोड़ की डिमांड है, दारूबाज़ है और ना जाने क्या क्या |सेठ जी, मैं ये सब भोग चुका हूं इसलिए आप को सावधान कर रहा हूं| ये लोग अपना काम तो अपने गोदाम पर शांतिपूर्वक निपटा लेते हैं और फिर आपकी दुकान पर बैठ कर आपके काम पर नज़र रखते हैं | आपके सामने मीठी बातें करके आपके राज़ जानने लगते हैं और दूसरों को आपकी बातें बताकर अपने आपको आपका करीबी बताने की चेष्टा करते हैं और कालांतर में आपको नुकसान पहुंचाते हैं |जब मैंने उसे स्कूटर पर जाते देखा तभी मैं ये समझ गया था कि आपने इसको अपना समझ कर फोन कर दिया होगा और ये अपनी छोटी बुद्धि का परिचय देते हुए पेमेंट मांगने आया होगा |सेठ जी, ऐसे लोग इंसान के रूप में नीम के पेड़ के नीचे नाचने वाली भूतनीयों के समान होते हैं जो ना इस धरती की हो पाती हैं और ना ही यमपुरी की | ये श्वानपुत्र दुकान के बाहर ही ठीक होते हैं ना कि दुकान के अंदर | आप इनसे काम तो कर लीजिए लेकिन इनको पेमेंट इनके गोदाम पर ही भिजवा दिया करें और कभी भी कोई निजी बात इनको ना बतायें|अब आप देखियेगा कि 3-4 दिन बाद ये ही व्यक्ति मार्केट में बोलता फिरेगा कि आपके बच्चे को बुखार आया था और वह आपके साथ अस्पताल गया था |"
इतना सब सुनकर मेरे तो दिमाग को चक्कर आने लगा था लेकिन तभी मेरे सप्लायर का फ़ोन बज उठा जो कि उनके घर से था |उन्हें अब जाना था |आज मेरे अंदर एक नई चेतना का संचार कर उन्होंने एक नया आयाम दिया था मेरे जीवन को | उन्हें विदा करके मैं अंदर अयन के पास आया और उसे चैन से सोता देख अपने खयालों में खो गया |
आज 1 महीने बाद मैं अपनी दुकान पर बैठा हूँ और पूर्णतः कर्जमुक्त हूँ | मेरे सप्लायर के 50,000/- समेत पुराना पेमेंट भी मैं चुका चुका हूं और नीम के पेड़ के नीचे नाचने वाली भूतनियों से आवश्यक दूरी भी बना चुका हूँ |
तो साथियों, ये था एक छोटा सा वृत्तांत |अभी आज के लिए कहानीयों की श्रृंखला की पहली कड़ी को यहीं पर विराम देता हूँ और नये अनुभवों के साथ फिर आपके समक्ष आने के वादे के साथ आपसे विदा लेता हूँ |
No comments:
Post a Comment